जिन दुकानों से लाखों की कमाई, किराया नाममात्र










किराया बढ़ाने की बात आने पर प्रशासनिक अधिकारियों पर बनाया जाता है राजनीतिक दबाव-1984 से किराये पर चल रही हैं मंदिर न्यास की दुकानें, अब तक नहीं बढ़ा किराया-कई दुकानदारों ने दुकानों को बढ़ाकर किया है अतिक्रमण,नहीं हो रही कार्रवाई
श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर न्यास की शहर की प्राइम साइट बस अड्डा के पास करीब 31 दुकानें हैं, लेकिन एक दुकान को छोड़कर अन्य सभी दुकानों का किराया नाम मात्र है। जिन दुकानों से शहर के व्यवसायी हर माह लाखों रुपये की कमाई करते हैं, उन्हीं दुकानों का किराया मंदिर न्यास को न के बराबर मिल रहा है।
हैरानी का विषय है कि अब तक राजनीतिक दबाव के कारण इस किराये को बढ़ाया ही नहीं गया। 1984 से मंदिर न्यास ने दुकानें किराये पर देना शुरू किया था। उस समय दुकानों का जो किराया था उसमें अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ। समय के साथ दुकानदारों की आमदनी तो बढ़ती रही, लेकिन सरकारी राजस्व को लगातार चूना लगता रहा। इस तरफ शासन ने ध्यान दिया और न ही प्रशासन ने इसका ख्याल किया। बताते चलें कि जिस लोकेशन पर दुकानें हैं वहां पर एक दुकान का किराया 12 हजार रुपये प्रति माह है, लेकिन इन 30 दुकानों का किराया सबसे कम 290 और सबसे ज्यादा 1500 है। बीच में कहीं किराये बढ़ाया भी तो वह नाम मात्र ही बढ़ा। हालांकि 31वीं दुकान जो गत वर्षकिराये पर दी गई है उसका किराया 12 हजार लिया जा रहा है। अब सवाल यह उठता है कि जब एक दुकान का किराया 12 हजार है तो अन्य दुकानें जो उसी लोकेशन पर हैं उनका किराया न के बराबर क्यों है। किसकी सह पर दुकानदार मनमर्जी का किराया मंदिर न्यास को दे रहे हैं।

