मां ने किडनी देकर जान बचाई:बेटे ने एशियाई खेल में कांस्य पदक जीतकर दिया तोहफा










किडनी पेशेंट जीने की उम्मीद छोड़ चुके होते हैं, लेकिन यह हकीकत नहीं है। उन्हें मोटिवेट करने की जरूरत होती है। सैयद मुजाहिद नकवी बताते हैं उनके साथ भी ऐसा ही था, लेकिन करीब 12 साल पहले मां की किडनी मुझे लगाई तो जीने की एक उम्मीद फिर से जगी। इसके बाद जब मैंने किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके लोगों को भागते-दौड़ते और कई गेम्स एक्टिविटी में भाग लेते देखता तो मेरा हौसला बढ़ जाता।
मैने पेटांक गेम खेलना शुरू किया। फिर क्या था, जीवन में एक नई उम्मीद के साथ उमंग भी दौड़ने लगी। बैंकाॅक में चार दिन हुई गेम्स एक्टिविटी में कांस्य पदक हासिल किया है। मेरी तरह कोई भी किडनी पेशेंट गेम्स खेल सकता है, बशर्ते वह किडनी ट्रांसप्लांट करवाने के बाद अपनी सेहत का ख्याल रखे। मैं पूरी तरह से स्वस्थ्य हूं। दिखने में जवान लगता हूं। किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके मरीजों को मोटिवेट भी करता हूं।

