103 वर्षीय नर्मदा देवी का सम्मान: लोकतंत्र में अद्वितीय योगदान










103 वर्षीय नर्मदा देवी का सम्मान
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर, 103 वर्षीय श्रीमती नर्मदा देवी को राजस्थान निर्वाचन आयोग द्वारा लोकतांत्रिक प्रक्रिया में उनके अद्वितीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनके जीवन का यह सफर, जिसमें उन्होंने देश के पहले चुनाव से वोट देना शुरू किया, प्रेरणा का स्रोत है।
सम्मान समारोह:
राजस्थान निर्वाचन आयोग द्वारा अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के मौके पर 103 वर्षीय श्रीमती नर्मदा देवी का उनके निवास स्थान पर सम्मान किया गया। यह सम्मान ताराचंद मीणा (R.A.S. अधिकारी) द्वारा उन्हें उनके घर पर जाकर प्रदान किया गया, और राजस्थान मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन (I.A.S.) द्वारा हस्ताक्षरित सम्मान-पत्र उन्हें दिया गया। यह सम्मान नर्मदा देवी को उनके जीवनभर के लोकतांत्रिक कर्तव्य के प्रति समर्पण और चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रदान किया गया।
1947 का बंटवारा और चुनावी सफर:
नर्मदा देवी का जीवन संघर्ष और सेवा का प्रतीक रहा है। 1947 के बंटवारे के दौरान उन्होंने अपने परिवार के साथ रेवाड़ी में एक कठिन समय का सामना किया। उनके ससुर, छुट्टन लाल शर्मा, जो रेलवे में गुड्स अधिकारी थे, ने उस विभाजनकाल में माल गाड़ी के डिब्बे में छिपकर अपनी जान बचाई थी, जबकि नर्मदा देवी घंटों तक गुसलखाने (स्नानघर)में छिपी रहीं।
उनका यह अनुभव उनके दृढ़ संकल्प और साहस का गवाह है, जिसने उन्हें आज भी जीवन के प्रति सजग और सक्रिय बनाए रखा है। उन्होंने अपने जीवन में हर चुनाव में मतदान किया है और देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान किया है।
चुनावी अनुभव:
पहले चुनाव से ही नर्मदा देवी ने वोट देना शुरू किया। वे चुनावी माहौल की पुरानी यादों में खोते हुए कहती हैं, “पहले नेताओं के बीच मुद्दों पर चर्चा होती थी, पर आजकल एक-दूसरे की आलोचना पर जोर है।” 1960-70 के दशक के चुनावी माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस समय चुनावों में गीत-कविताओं का महत्व होता था, और पक्ष-विपक्ष में मतभेद के बावजूद आपसी घनिष्ठता बनी रहती थी। अब चुनावी माहौल पूरी तरह बदल गया है।
परिवार की उपस्थिति:
सम्मान समारोह के दौरान उनके परिवार के सदस्य, जिनमें रामावतार शर्मा, डॉ. अल्पना शर्मा, सुमन शर्मा, इंजीनियर गौरांग शर्मा, और श्वेतांग शर्मा शामिल थे, भी उपस्थित रहे। सभी ने इस सम्मान पर गर्व व्यक्त किया और अपनी मां/दादी की लंबी उम्र और उनके लोकतांत्रिक सेवा को सराहा।
समाज के लिए प्रेरणा:
नर्मदा देवी का जीवन सभी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा है। उन्होंने लोकतंत्र की बुनियादी प्रक्रिया में निरंतर भाग लेकर यह संदेश दिया है कि उम्र चाहे जितनी भी हो, प्रत्येक नागरिक का मताधिकार महत्वपूर्ण है। उनके जीवन के इस अद्वितीय सफर में, जहां उन्होंने विभाजनकाल से लेकर आज तक देश के हर चुनाव में सक्रिय भागीदारी निभाई, वे देश की लोकतांत्रिक परंपरा की एक जीवंत मिसाल हैं।
नर्मदा देवी जैसे वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करता है। उनका जीवन अनुभव और देशभक्ति की भावना युवा पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का काम करती है। ऐसे नागरिकों के सम्मान से हमें यह याद दिलाया जाता है कि हर व्यक्ति का योगदान, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करता है।

