Bikaner : 20-40 साल के युवा हो रहे प्रभावित, रोज हार्ट अटेक से एक की मौत…….










बीकानेर पहले कोरोना का भयावह दौर। अब तेजी से बदलता मौसम। खासतौर से सर्दी का सीजन मरीजों पर भारी पड़ रहा है। सर्दी में दिल के दर्द के रोगियों की बढ़ी संख्या इसी तथ्य की ओर इशारा कर रही है।
ठंड के मौसम में श्वास, ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक के मरीजों की संख्या अचानक ही बढ़ गई है। ओपीडी में दिक्कतों की शिकायत लेकर आ रहे लोग यहां हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक का पता चलने पर इमरजेंसी में उपचार कराने पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे अधिक ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक वाले मरीज शामिल हैं। लगभग हर रोज एक-दो युवा व बुजुर्ग की ब्रेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक से मौत हो रही है। पीबीएम अस्पताल से संबद्ध हल्दीराम मूलचंद कार्डियो वस्कुलर सेंटर में सामान्य दिनों की तुलना में जनवरी से मार्च तक सीने में दर्द लेकर ज्यादा मरीज पहुंचे हैं। जानकारी के मुताबिक, हार्ट अस्पताल की ओपीडी में हर दिन 550 मरीज पहुंच रहे हैं, जिसमें से 70-80 मरीज हार्ट अटैक के आ रहे हैं। हर माह 800 से 950 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। 450 मरीजों को हालत गंभीर होने पर आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ता है। हर माह 20 से 22 मरीजों की मौत होने का आंकड़ा सामने आ रहा है।
चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें, तो कोरोनाकाल के बाद हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि तो हुई ही है, साथ ही युवाओं में अचानक दिल के रोगों की पैठ ने इस चिंता को और बढ़ाया है। कई नामचीन हस्तियों ने तो व्यायाम के दौरान ही दम तोड़ा। इससे फिटनेस को लेकर डरने और संयमित रहने वाले दोनों वर्गों में संशय बढ़ा है। खासतौर से युवाओं की मृत्यु दर ने काफी चिंतित किया है। चिकित्सक इसके पीछे कोरोना के ऑफ्टर इफेक्ट की संभावना से इनकार नहीं कर रहे। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि इस पर कई स्तरों पर विश्लेषण चल रहे हैं। हालांकि, कोरोनाकाल के बाद ही अचानक ऐसे मामलों में आई तेजी ने चिंतित जरूर किया है।
जस्सूसर गेट क्षेत्र निवासी 18 वर्षीय युवक कार्डियो मायोपैथी से पीड़ित है। उसका इलाज हार्ट हॉस्पिटल में चल रहा है। खेलते-खेलते करीब तीन महीने पहले वह बेहोश हो गया। डॉ. पिन्टू नाहटा को चेक कराया, तो बताया कि कार्डियो मायोपैथी से ग्रस्त है। मरीज को एआईसीडी (विशेष प्रकार का पेसमेकर) लगवाने की सलाह दी गई
सर्दी के मौसम में धमनियां सिकुड़ जाती हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है और हार्ट की धमनियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने से खून का थक्का जमने लगता है, जिससे हार्ट अटैक की स्थिति पैदा होती है। इस दौरान दिल का दौरा पड़ने से 30 प्रतिशत मरीजों की घर पर ही मौत हो जाती है। 70 प्रतिशत मरीज ही अस्पताल पहुंच पाते हैं। हार्ट अटैक से 20 से 35 साल के युवा ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इनमें भी पुरुषों की संख्या अधिक है। हार्ट अटैक सुबह के समय लोगों को ज्यादा शिकार बना रहा है। दिनचर्या में सुधार ऐसी स्थिति से बचने का सबसे बेहतर उपाय है। संयमित के साथ-साथ नियमित आहार-व्यवहार न सिर्फ आपके दिल-दिमाग को मजबूत रखता है, बल्कि आपको प्रसन्नचित भी रख सकता है। बस जरूरत इतनी भर है कि हम अपनी दैनिक दिनचर्या में प्रतिदिन थोड़ा शारीरिक श्रम मसलन घूमना, व्यायाम करना, योग और प्राणायाम को शामिलकर लें।

