Bikaner : दो महीने में पीबीएम में ब्लैक फंगस के लक्षण वाले 70 से ज्यादा मरीज…..


बीकानेर कोरोनाकाल में जानलेवा साबित होने वाला ब्लैक फंगस संक्रमण यानी म्यूकोर्मिकोसिस अब फिर से दस्तक देने लगा है। पीबीएम हॉस्पिटल में पिछले दो महीने में 70 से अधिक रोगी आ चुके हैं।

अधिकांश श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ जिले के हैं। पीबीएम हॉस्पिटल के मेडिसिन विभाग में फंगस इंफेक्शन के मरीज रोज आ रहे हैं। जबड़े ही हड्‌डी गलने और तालू काला पड़ने पर उन्हें सर्जरी के लिए ईएनटी और दंत रोग विभाग में भेजा जा रहा है। खास बात ये है कि माइक्रोबायोलॉजी की जांच में ब्लैक फंगस कम रिपोर्ट हो रहे हैं, जबकि लक्षण वही हैं। इन मरीजों को इलाज ब्लैक फंगस मानकर ही किया जा रहा है। इसके लिए मरीजों को लाइपोसोमल एम्फोटेरिसिन-बी इंजेक्शन की 40 से 60 डोज लग रही है

एक इंजेक्शन की बाजार कीमत चार हजार रुपए से अधिक है। एक मरीज के डेढ़ से पौने दो लाख रुपए के इंजेक्शन लगते हैं। यह इंजेक्शन पीबीएम हॉस्पिटल में निशुल्क मिलते हैं। इलाज सस्ता होने के कारण हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के सभी मरीज यहीं पर आने लगे हैं। इसके अलावा पंजाब से भी मरीज यहां पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार नमी वाले इलाकों में रहने वाले लोग इस बीमारी के ज्यादा शिकार हो रहे हैं। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ नहरी इलाका होने के कारण वहां नमी ज्यादा रहती है। पूर्व में कोरोना के शिकार हो चुके ऐसे लोगों का शुगर लेवल काफी बढ़ा हुआ होता है। इसलिए ये लोग ब्लैक फंगस संक्रमण के शिकार जल्दी हो रहे हैं। राहत की बात ये है कि इस बीमारी के कारण अब तक किसी की मृत्यु के समाचार नहीं हैं।

डॉ. गौरव गुप्ता का कहना है कि ब्लैक फंगस संक्रमण या म्यूकोर्मिकोसिस एक गंभीर बीमारी है, लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण घातक हो सकता है। यदि प्रारंभिक अवस्था में उपचार न किया जाए तो 50-80% रोगियों की मृत्यु हो सकती है। यह आमतौर पर लोगों में तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली कोरोना वायरस (कोविड-19), वायरल बीमारियों, इम्यूनोडेफिशिएंसी विकारों, कैंसर, पुरानी बीमारियों, अन्य चिकित्सा स्थितियों से प्रभावित होती है या लोग ऐसी दवाएं लेते हैं, जो बीमारी से लड़ने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली को दबा देती हैं। म्यूकोर्मिकोसिस कवक म्यूकोर्मिसेट्स और म्यूकोरेल्स क्रम से संबंधित फफूंदी के कारण होता है जो पूरे पर्यावरण में हवा में मौजूद होता है। विशेष रूप से मिट्टी, सड़ने वाले कार्बनिक सब्सट्रेट, खाद के ढेर, जानवरों के गोबर, सड़ती लकड़ी और पौधों की सामग्री में। इसे सड़ते फलों और पुरानी ब्रेड पर काले रंग की वृद्धि के रूप में आसानी से देखा जा सकता है।

दांत ढीले पड़ना, हिलना
चेहरे पर सूजन
आंखाें की राेशनी कम हाे जाना
नाक से पस आना
नाक-तालू का एरिया काला पड़ जाना
पीबीएम हॉस्पिटल में फंगस इंफेक्शन के रोगी निरंतर आ रहे हैं। ब्लैक फंगस को लेकर कोरोनाकाल में बोर्ड गठित किया था। वह अब भी एक्टिव है। यहां इलाज अच्छा मिलने के कारण संभाग के अलावा पंजाब से भी पेशेंट आने लगे हैं।
इधर, दो दिन में कोरोना और स्वाइन फ्लू के 7-7 रोगी और आए

कोरोना और स्वाइन फ्लू दोनों के ही मरीज अब साथ-साथ रिपोर्ट होने लगे हैं। दो दिन में काेराेना और स्वाइन फ्लू के 7-7 रोगी और रिपोर्ट हुए हैं। सरदार पटेल के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की मंगलवार को आई रिपोर्ट में कोरोना के छह केस पॉजिटिव आए हैं, जिनमें से एक नागौर के खींवसर का है। यह मरीज पीबीएम में पहले से ही उपचाराधीन है। मंगलवार को कोविड पॉजिटिव आने पर उसे डी वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। कोरोना का सोमवार को एक मरीज पॉजिटिव आया था। कोरोना के अब तक कुल 28 केस आ चुके हैं। इसी प्रकार स्वाइन फ्लू के तीन केस मंगलवार को आए हैं, जबकि सोमवार को चार केस रिपोर्ट हुए थे। इस साल में अब तक करीब 60 केस पॉजिटिव रिपोर्ट हो चुके हैं। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. लोकेश गुप्ता ने बताया कि स्वाइन फ्लू के जिले के मरीजों की संख्या 48 है। अन्य मरीज दूसरे जिलों के हैं। उन्होंने बताया कि पीएचसी और सीएचसी लेवल पर रैपिड रिस्पॉन्स टीम लगातार ऐसे मरीजों के घरों के आस पास सर्वे कर रही है। सभी को पर्याप्त मात्रा में दवा के किट देकर घर में ही आइसोलेट रहने को कहा जा रहा है।


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