Bikaner : संविदा कर्मियों को हटाने पर कोर्ट की रोक, शिक्षा विभाग को नोटिस……..


बीकानेर सरकार बदलते ही संविदा शिक्षक को हटाने के शिक्षा विभाग के आदेश पर जोधपुर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है. इस शिक्षक की नियुक्ति जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश पर की गई थी लेकिन प्राचार्य ने संविदा सेवा समाप्त करने के आदेश जारी कर दिए।

इस शिक्षक को स्वायत्त शासन विभाग के आदेश का हवाला देते हुए हटाया गया था, जिस पर शिक्षक ने आपत्ति दर्ज कराते हुए हाईकोर्ट में रिट दायर की थी. राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गिन्नाणी पंवरसर में अध्यापक रमजान अली की नियुक्ति संविदा आधार पर हुई थी। वह पहले सरकारी सेवा में थे और सेवानिवृत्ति के बाद फिर से काम करना शुरू कर दिया। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के हटने के बाद बीजेपी सरकार ने एक आदेश जारी कर सभी संविदा कर्मचारियों को हटा दिया था. रमज़ान अली 28 फरवरी 22 को ग्रेड थर्ड लेवल टू (सामाजिक विज्ञान) के पद से सेवानिवृत्त हुए

सेवानिवृत्ति के बाद 1 मई 23 को जिला शिक्षा अधिकारी, माध्यमिक शिक्षा (मुख्यालय), बीकानेर द्वारा ग्रेड के रिक्त पद पर पुनः नियुक्ति दी गई तृतीय राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गिन्नाणी पँवरसर में संविदा आधार पर। याचिकाकर्ता के पुनर्नियुक्ति आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि ”यह पुनर्नियुक्ति अगले एक वर्ष या नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होने तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाती है.” आठ माह बाद ही राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय गिन्नाणी पंवरसर के प्रधानाचार्य ने 13 जनवरी को यह कहते हुए अनुबंध समाप्त कर दिया कि स्वायत्त शासन विभाग ने जिन सेवानिवृत्त अधिकारियों व कर्मचारियों को अनुबंध पर लिया जा रहा था, उनकी सेवाएं समाप्त कर दी हैं। अतः आवेदक को विद्यालय आने की आवश्यकता नहीं है। आगे वेतन भी नहीं देना है।

इस पर अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से जोधपुर उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका प्रस्तुत की गई। हाईकोर्ट के समक्ष आवेदक के वकील का तर्क था कि रमजान को जिला शिक्षा अधिकारी ने संविदा पर नियुक्त किया था, ऐसे में प्राचार्य को उसे हटाने का कोई अधिकार नहीं है। दूसरे, आदेश में स्पष्ट उल्लेख था कि यह नियुक्ति एक वर्ष या नियमित शिक्षक मिलने तक की गयी है. वर्तमान में प्रार्थी की नियुक्ति को न तो एक वर्ष बीता है और न ही किसी नियमित शिक्षक की नियुक्ति हुई है.

दूसरा तर्क यह भी था कि प्राचार्य द्वारा सेवा पृथक्करण आदेश में यह उल्लेख करना कि स्वायत्त शासन विभाग द्वारा सभी संविदा कर्मचारियों की सेवाएँ समाप्त कर दी गई हैं, अत: प्रार्थी की सेवाएँ भी समाप्त की जाती हैं, पूर्णतः विधि विरुद्ध एवं अनुचित है। क्योंकि आवेदक स्वायत्त शासन विभाग का कर्मचारी नहीं बल्कि माध्यमिक शिक्षा विभाग का कर्मचारी है। अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होकर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता रमजान अली के प्रधानाचार्य द्वारा जारी सेवा पृथक्करण आदेश के खिलाफ दायर रिट याचिका पर अंतरिम रोक लगा दी। माध्यमिक शिक्षा विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।


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