बीकानेर में 74 फीसदी से ज्यादा पड़े वोट, कहां-कितनेे पड़े वोट, देखिए यहां..










जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम पर 74.09 प्रतिशत मतदान हुआ। खाजूवाला में 74 प्रतिशत, बीकानेर पश्चिम क्षेत्र में 75.01 प्रतिशत, बीकानेर पूर्व क्षेत्र में 66.97 प्रतिशत, कोलायत क्षेत्र में 78 प्रतिशत, लूणकरनसर क्षेत्र में 75.12 प्रतिशत, श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में 74.88 प्रतिशत और नोखा विधानसभा क्षेत्र में 74.66 प्रतिशत वोट पड़े।
शनिवार को जिले के सातों विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम पर 74.09 प्रतिशत मतदान हुआ। सुबह 7 से शाम 6 बजे तक चले मतदान के दौरान मतदाताओं ने उत्साह के साथ मतदान केन्द्रों पर पहुंचकर अपना वोट डाला। जिले में मतदान के लिए निर्वाचन विभाग ने 1640 मतदान केन्द्र बनाए थे। हालांकि मतदान का प्रतिशत पिछले विधानसभा चुनाव से आगे नहीं निकल पाया। निर्वाचन विभाग और सामाजिक संगठनों की ओर से लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करने के भरसक प्रयास के बावजूद मतदान प्रतिशत में आशानुरूप बढ़ोतरी नहीं हो पाई। हालांकि अभी घर-घर जाकर मत पेटियों में कराए गए मतदान (होम वोटिंग) और डाक मतपत्रों का आंकड़ा कुल मतदान में नहीं जुड़ा है। इसके बाद जो अंतिम मतदान प्रतिशत सामने आएगा वह पिछले चुनाव के 75 फीसदी मतदान के आंकड़े से पार निकल जाएगा। पहली बार मतदान करने वाले 18 से 19 साल आयु के मतदाताओं में मतदान के प्रति उत्साह देखने को मिला। महिला मतदाताओं की बूथों पर लंबी कतारें नजर आई। जिले के लूणकरनसर, नोखा और खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र में रात 8 बजे के बाद तक मतदान चलता रहा।
जिले में खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र में 74 प्रतिशत, बीकानेर पश्चिम क्षेत्र में 75.01 प्रतिशत, बीकानेर पूर्व क्षेत्र में 66.97 प्रतिशत, कोलायत क्षेत्र में 78 प्रतिशत, लूणकरनसर क्षेत्र में 75.12 प्रतिशत, श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में 74.88 प्रतिशत और नोखा विधानसभा क्षेत्र में 74.66 प्रतिशत मतदाताओं ने ईवीएम मशीन के माध्यम से अपने मताधिकार का उपयोग किया।
मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी नहीं होने के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। सबसे प्रमुख कारण दो दिन पहले ही देवउठनी एकादशी का अबुझ सावा होने के चलते लोग विवाह समारोह में व्यस्तता के चलते वोट कम डाल पाए। इसी के साथ ही एक कारण दीपावली को भी माना जा रहा है। आम तौर पर यहां के वोटर जो महानगरों या अन्य जगह कामकाज, नौकरी आदि करते हैं वे दीपावली पर घर आते हैं। दीपावली के 13 दिन बाद मतदान होने से प्रवासी वोटर वापस जा चुके थे। एक पखवाड़ा पहले ही घर आकर गए थे, ऐसे में दुबारा वोट डालने कम आए। इसी के साथ गत 17 से 20 नवम्बर तक चले छठ पर्व के चलते बिहार समुदाय के लोग बिहार गए हुए थे। इनमें से कई मतदान दिवस शनिवार तक नहीं लौटे।

