Bikaner : लक्ष्मीनाथ मंदिर में कपाट खुलने पर दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु……कार्तिक स्नान शुरू










बीकानेर पूर्णिमा से कार्तिक स्नान शुरू हो गया है. इसका समापन 27 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा पर होगा। मान्यता है कि पूरे कार्तिक माह में सूर्योदय से पहले उठकर किसी नदी या तालाब में स्नान और दान करने से वैकुंठ लोक की प्राप्ति होती है।
ऐसा करने वाला व्यक्ति पाप से मुक्त हो जाता है। कार्तिक माह में स्वयं देवता भी गंगा स्नान करने पृथ्वी पर आते हैं। कार्तिक का पूरा महीना भगवान विष्णु को समर्पित है। शास्त्रों में माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों, तालाबों में स्नान करने और भगवान श्रीहरि के नाम का जाप करने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। शहरी क्षेत्र में कार्तिक स्नान के बाद सुबह 5.30 बजे नगर सेठ लक्ष्मीनाथजी मंदिर के पट खुलते हुए दर्शन करने की परंपरा है. इन दिनों सैकड़ों महिलाएं और बच्चे कार्तिक स्नान कर दर्शन के लिए आ रहे हैं। मंदिर के पुजारी शंकर महाराज बताते हैं कि कार्तिक माह में सुबह जल्दी स्नान कर लक्ष्मीनाथजी के खुले पट के दर्शन करने की होड़ रहती है। यह आस्था का बहुत बड़ा पर्व है.
ऐसे में भगवान का हर दिन नया श्रृंगार किया जा रहा है. मंदिर के खुलने का समय सुबह 5.30 बजे कर दिया गया है. राजभोग अब सुबह 10.15 की जगह 10.30 बजे और राजभोग आरती सुबह 10.45 की जगह 11 बजे की गई है. ज्योतिषाचार्य पंडित हरिनारायण व्यास मन्नासा बताते हैं कि कार्तिक मास के अनुष्ठान आदि शुरू हो गए हैं। अन्य महीनों की तुलना में कार्तिक का अलग ही महत्व है। जिस प्रकार सावन में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होता है, उसी प्रकार कार्तिक माह में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। कार्तिक माह में भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन में सुख-सौभाग्य बढ़ता है और आयु भी बढ़ती है तथा अचानक आने वाले संकटों का अंत हो जाता है। घर में सुख-शांति बनी रहती है. कार्तिक माह में तुलसी के पत्तों से श्री विष्णु की पूजा करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। कार्तिक माह में शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाना चाहिए। इससे घर की सुख-समृद्धि बनी रहती है। इस महीने में हर दिन सुबह उठकर स्नान करें और तुलसी को जल चढ़ाएं। ऐसा करने से घर की सभी परेशानियां दूर हो जाएंगी। सुबह उठकर तुलसी के पत्तों का सेवन भी बहुत फायदेमंद होता है। चातुर्मास का आखिरी महीना: चतुर्मास के चार महीनों में से कार्तिक आखिरी महीना होता है। इसके अलावा श्रावण, भाद्रपद और आश्विन बीत चुके हैं।
कार्तिक माह के बाद ही मांगलिक कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं। इस माह में स्नान और दान का विशेष महत्व है। पुराणों में कहा गया है कि कार्तिक माह में घर के बाहर किसी पवित्र नदी में स्नान करने, गायत्री का जाप करने और दिन में केवल एक बार भोजन करने से व्यक्ति को शुभ फल मिलता है और उसकी उन्नति होती है। यदि कोई बाहर जाकर स्नान करने में असमर्थ है तो वह घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिला ले और मन में उन नदियों का भाव रखकर स्नान कर ले तो उसे पूर्ण फल मिलता है। कार्तिक के पूरे महीने में सुबह स्नान के बाद सूर्य देव को जल अवश्य चढ़ाना चाहिए।

