लंपी बीमारी में फंगस वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन खरीदने का आरोप:


जिला पशुपालन विभाग सीकर की ओर से लंपी में फंगस वाले एंटीबायोटिक इंजेक्शन खरीदकर अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप में वेटेरनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन ने मामले की जांच को लेकर कलेक्टर व एडिशनल एसपी एसीबी को ज्ञापन सौंपा

वेटेरनरी डॉक्टर्स एसोसिएशन सीकर के जिलाध्यक्ष डॉ.विकास झाझड़िया ने बताया कि पशुपालन विभाग सीकर की ओर से लंपी बीमारी में विभाग के अधिकारियों ने घटिया और फंगस भरे एंटीबायोटिक इंजेक्शन खरीदे थे। गायों को घटिया इंजेक्शन लगाने के कारण फंगस नहीं रुका बल्कि उनके फेफड़ों में इंफेक्शन हो गया था।

लंपी बीमारी पर तुरंत प्रभाव से नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार ने जिला स्तर पर दवा खरीदने के आदेश जारी किए थे। जिसके बाद दवा खरीद के लिए स्थानीय विधायक ने पशुपालन विभाग को फंड दिया। उसे फंड से संयुक्त निदेशक पशुपालन विभाग सीकर द्वारा दवाइयों की खरीद की गई जिसमें 7 लाख से अधिक एनरोफ्लोक्सासीन इंजेक्शन खरीदे गए, जिसमें फंगस पाई गई।

स्थानीय मीडिया में इस बात का खुलासा हुआ तो पशुपालन विभाग ने जिले भर से फंगस वाले इंजेक्शन जिला पशुपालन विभाग कार्यालय में वापस मंगवा लिए और आनन- फानन में फर्म को भुगतान भी कर दिया। नियमों के अनुसार जब किसी भी फर्म की दवाइयां खराब मिलती है तो उस फर्म को विभाग की ओर से ब्लैक लिस्ट किया जाता है और उसका भुगतान जांच होने के बाद ही किया जाता है लेकिन पशुपालन विभाग ने भ्रष्टाचार करते हुए फर्म का भुगतान कर दिया।


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