Bikaner : रूट पर ज्यादा दिक्कतें, बसों की संख्या में आई गिरावट…..










चुनाव को लेकर प्रदेशभर की 30 हजार प्राइवेट बसों में से 21 हजार बसों का अधिग्रहण निर्वाचन विभाग ने कर लिया था। बाकी बची हुई बसें शादी समारोह के लिए चली गई। नतीजा प्रदेश के अंतरराज्यीय बस स्टेंड पर लोगों की भीड़ लगी रही
जो व्यक्ति निजी बसों से यात्रा करते थे। वह दिनभर शहर के चौमूं पुलिया, सांगानेर, ट्रांसपोर्ट नगर, 200 फीट चौराहे पर बसों का इंतजार करते नजर आए
परमिट के आधार पर दिल्ली रूट के बाद प्रदेश का सबसे बड़ा रूट जयपुर-बीकानेर है। इस पर सबसे ज्यादा करीब 3 हजार परमिट निजी बसों के चक्कर के आधार पर है। इस रूट के सीकर, बीकानेर और जयपुर-1 की 8402 बसों का अधिग्रहण तीनों आरटीओ में हुआ है। इस रूट पर यात्रीभार ज्यादा होने के कारण सरकारी बसों की कमी रहती है। चुनाव ड्यूटी में लगी बसों के चलते इस रूट पर लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा यात्रीभार रूट जयपुर-कोटा है। इस पर करीब 1500 निजी बसों का संचालन फेरों के आधार पर होता है। इस रूट पर छोटे-छोटे गांवों को जोड़ने वाली बसों की संख्या ज्यादा है। वहीं, तीसरे नंबर पर जयपुर-आगरा रूट है। यहां पर दौसा, बांदीकुई, महवा और भरतपुर तक बसों का संचालन गांव के रूट पर होता है। यहां पर लोगों को शुक्रवार के दिन काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसका दबाब इन रूट पर चलने वाली ट्रेनों पर देखा गया। बता दें कि इन रूट पर जीप का संचालन ज्यादा होता है।

