Bikaner : डॉक्टर पर हमले को लेकर कॉलेज प्राचार्य डॉ. सोनी ने विभागाध्यक्ष पर उतारा गुस्सा……


बीकानेर एसपी मेडिकल कॉलेज, बीकानेर की प्रतिष्ठा इन दिनों खतरे में है। कॉलेज में स्टाफ और डॉक्टरों के साथ मरीज के परिजनों के उलझने की घटनाएं तो आम तौर पर सुनाई देती थीं, लेकिन कॉलेज के हॉस्टल में घुस कर एक महिला रेजिडेंट पर हमला करने की दुस्साहसिक घटना हाल के वर्षों में शायद सुनने में नहीं मिली होगी।

घटना भी उसी शाम हुई, जब सुबह ही मेडिकल कॉलेज में अव्यवस्थाओं, सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर रेजिडेंट डॉक्टरों ने बहुत मान-मनौव्वल के बाद 24 घंटे पुरानी हड़ताल तोड़ी थी। लेकिन सुबह वे काम पर लौटे और रात होते-होते फिर रेजिडेंट डॉक्टर पर हॉस्टल में हुए हमले ने फिर उनको आंदोलित कर दिया। गुरुवार को उन्होंने घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकाला। उधर, दिन में हुई बैठक के दौरान जब मेडिकल कॉलेज प्राचार्य के सामने मानसिक रोग के विभागाध्यक्ष ने सुविधाओं और व्यवस्था में कमियों का पिटारा खोला, तो प्राचार्य डॉ. गुंजन सोनी बिफर पड़े। बेसाख्ता बोल पड़े…इतने साल तक आप कहां थे, जो अब कमियों का पिटारा खोल रहे हैं।

छात्रावास में 8 कमरों के लिए मेडिकल कॉलेज के उप प्राचार्य डॉ. लियाकत अली गौरी ने 2018 में इसकी स्वीकृति जारी की थी। तभी से केवल मानसिक रोग विभाग के रेजीडेंट ही इसमें रहते हैं। जबकि अस्पताल के अन्य विभागों के रेजीडेंट चिकित्सकों के लिए अलग से छात्रावास बने हुए हैं। मानसिक रोग विभाग के छात्रावास में सुरक्षा की भी कोई व्यवस्था नहीं है और केयर टेकर भी नहीं था। छात्रावास को मानसिक रोग विभाग ही निजी छात्रावास की तरह संचालित कर रहा था।

अस्पताल की दीवार के पास लगी थड़ियों को भी हटाने के मुद्दे पर चर्चा हुई। बाद में डॉ. सोनी ने ठेले-गाड़ों को हटाने के लिए नगर निगम को पत्र भेजा। अस्पताल के आसपास बड़ी संख्या में सुबह से देर रात तक गाड़े खड़े रहते हैं। इन गाड़ों पर अंडे सहित कई तरह की खाद्य वस्तुएं बिकती हैं, लेकिन अस्पताल प्रशासन ने इसे हटाने के लिए कभी कोई पहल नहीं की। मेडिकल कॉलेज छात्रावास के आसपास बिजली व्यवस्था के लिए एक दानदाता से दो लाख रुपए का सहयोग लिया गया है। जबकि सीसीटीवी कैमरे अस्पताल प्रशासन की तरफ से लगाने पर सहमति बनी।


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