Bikaner : डम्पर गाड़ी ने ऊँटगाड़ी को मारी टक्कर, एक युवक घायल….










बीकानेरडंपर गाड़ी की टक्कर से एक युवक घायल हो गया। शुक्रवार को कक्कू निवासी हड़मानाराम जाट ने मुकदमा दर्ज करवाया कि उसका भाई सवाईराम 24 नवंबर, 23 को भामटसर से पारवा गांव ऊंटगाड़ा लेकर चारा लेने जा रहा था।
सवाईराम के साथ ऊंटगाड़ा पर गांव का ही सुरेश भादू भी सवार था। जब उसका भाई सवाईराम पारवा गांव में टोल नाके से आगे पारवा की तरफ जा रहा था, तभी पीछे से एक 12 चक्का डंपर चालक ने तेज गति, लापरवाही व गफलत से चलाता हुआ आया और अपनी साइड में चल रहे उसके भाई सवाईराम के ऊंटगाड़े को पीछे से टक्कर मार दी, जिससे उसका भाई घायल हो गया। घायल भाई को पीबीएम हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है जहां उसका उपचार चल रहा है।
बीकानेर एक बार फिर कोहरे की आगोश में है। तापमान में गिरावट के साथ ही कोहरे के कारण नेशनल हाईवे पर विजिबिलिटी कम हो गई है। ऐसे में भारी वाहनों के चालक अब ढाबों पर आराम कर रहे हैं। कोहरा छंटने के बाद ही इन गाड़ियों के पहिए पर फिर सड़क पर दौड़ेंगे। खासकर लूणकरनसर से सूरतगढ़ और बीकानेर दोनों तरफ कोहरे ने वाहन चालकों को परेशान कर दिया है। उधर, कोहरे ने किसानों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। न सिर्फ लूणकरनसर बल्कि नापासर व बीकानेर शहर में भी सुबह कोहरे का असर दिखाई दिया। स्कूल जाने वाले बच्चों को विजिबिलिटी कम होने के कारण जल्दी घर से निकलना पड़ा है। आमतौर पर पैदल जाने वाले स्टूडेंट्स अपने गार्जन के साथ स्कूल पहुंचे। सर्दी के बावजूद बीकानेर के अधिकांश प्राइवेट स्कूलों का समय आठ बजे के आसपास ही हो पाया है। कुछ ही स्कूल अब नौ बजे संचालित हो रहे हैं।
कोहरे के बाद भी तापमान में भी गिरावट आ रही है। बीते चौबीस घंटे में अधिकतम तापमान में तो कमी आई है लेकिन न्यूनतम तापमान घटने के बजाय सामान्य से करीब चार डिग्री सेल्सियस अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार बीकानेर में बीते चौबीस घंटे में अधिकतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस रहा। जो सामान्य से 2.1 डिग्री सेल्सियस कम है। वहीं न्यूनतम तापमान 14.3 डिग्री सेल्सियस रहा। सामान्य तौर पर ये 10 डिग्री सेल्सियस के आसपास होता है यानी सामान्य से करीब चार डिग्री ज्यादा रहा। शुक्रवार सुबह तापमान में इससे भी ज्यादा गिरावट की उम्मीद की जा रही है। लूणकरनसर कस्बे में कोहरे का ये आलम था कि सात बजे तक विजिबिलिटी शून्य पर थी। चारों तरफ अंधेरा छाया हुआ रहा और वाहनों की हेडलाइट्स से ही रास्ते का पता चल रहा था। ऐसे में अधिकांश वाहन हाइवे से नीचे उतर गए।

