Bikanerelection: बीकानेर की चार सीटेंं कांटे के मुकाबले में फंसी……


विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की भागदौड़ के बाद रविवार को सब रिलेक्स हो गए। कार्यालयों में प्रत्याशियों की चुनाव व्यवस्था संभाल रही कोर टीम ही आई। इसके साथ ही बूथों पर लगाए पोलिंग एजेंटों ने कार्यालयों में आकर अपने-अपने बूथ पर रही िस्थति की रिपोर्ट दी। इसके आधार पर प्रत्याशी के कार्यकर्ता जीत-हार के विश्लेषण में जुट गए हैं।

अधिकतर प्रत्याशी पिछले चुनाव वाले ही होने के चलते विश्लेषण का मुख्य आधार पिछले चुनाव में बूथों पर मिले वोटों के साथ तुलना कर किया जा रहा है। इसी के साथ प्रत्याशी के पक्ष में वोटरों का रुझान रहने वाले बूथों के कार्यकर्ता एक-दूसरे को बधाई भी देते दिखे। दिनभर बादलवाही और बूंदाबांदी के बीच चुनाव कार्यालयों में चाय की चुस्कियों के साथ जिले और प्रदेश की सीटों को लेकर राजनीतिक पंडितों के रुझान आने लगे हैं। असली िस्थति तो 3 दिसम्बर को मतगणना पर ही सामने आएगी। इस बार चार सीटों पर मुकाबला कांटे का रहने का अनुमान है। यहां पर कुछ भी परिणाम अपेक्षित वाली िस्थति बनी हुई है। खासकर बीकानेर पश्चिम, नोखा, श्रीडूंगरगढ़ और लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक भविष्यवाणी कर्ता भी स्पष्ट रूप से कुछ भी कहने से बच रहे हैं।

बीकानेर पश्चिम : कांग्रेस के प्रत्याशी केबिनेट मंत्री बी.डी. कल्ला और भाजपा प्रत्याशी जेठानंद व्यास में मुकाबला नजदीक का माना जा रहा है। यहां कोई भी समीकरण धराशायी हो सकता है।

नोखा : भाजपा के बिहारीलाल बिश्नोई और कांग्रेस की सुशीला डूडी के कांटे के मुकाबले में कन्हैयालाल झंवर और मगनाराम केडली की भूमिका को निर्णायक मानकर दिनभर कार्यकर्ता चर्चा करते रहे।

3. लूणकरनसर : भाजपा के सुमित गोदारा, निर्दलीय प्रभुदयाल सारस्वत और कांग्रेस के बागी वीरेन्द्र बेनीवाल पिछले चुनाव में भी प्रत्याशी थे। यहां इस बार कांग्रेस से डॉ. राजेन्द्र मूंड मैदान में है। मुकाबला चतुष्कोणीय बना हुआ है। यहां भी प्रत्याशी और समर्थक कोई सटीक अनुमान नहीं लगा पा रहे हैं।

श्रीडूंगरगढ़ : तीनों पुराने चेहरों में मुकाबला इस बार पिछले चुनाव से ज्यादा नजदीक का बना हुआ है।

जिले की तीन विधानसभा सीटों कोलायत, खाजूवाला और बीकानेर पूर्व में भी प्रत्याशी के समर्थक हवा के बहाव का धरातल पर कितना असर होगा, इसे लेकर अपने-अपने मत दे रहे हैं। बीकानेर पूर्व में हालांकि कांग्रेस प्रत्याशी यशपाल गहलोत के कार्यालय से जुड़े लोग अपना फीडबैक देते दिखे। दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी सिदि्ध कुमारी के कार्यकर्ता आंकड़ों पर ज्यादा मगजमारी नहीं कर रहे थे। इसी तरह कोलायत में एक पक्ष पूरी तरह आश्वस्त दिखा जबकि दूसरा पक्ष अपने पक्ष में चौंकाने वाले आंकड़े आने की बातें कर रहा था। यहां भी भाजपा-कांग्रेस के अलावा रालोपा प्रत्याशी ने मुकाबला त्रिकोणीय बना रखा था। खाजूवाला सीट पर केबिनेट मंत्री गोविन्दराम मेघवाल का मुकाबला भाजपा के डॉ. विश्वनाथ मेघवाल से है। यहां पर आम लोग जहां पिछले चुनाव में प्रत्याशियों के पक्ष-विपक्ष के माहौल की तुलना इस बार से कर अपने-अपने हिसाब से नतीजे निकाल रहे हैं।

पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में जिले में भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला बराबरी पर रहा था। सात में से तीन-तीन सीटों के बाद बची चौथी सीट माकपा के खाते में चली गई थी। इस बार ज्यादातर पुराने नेता ही मैदान में हैं लेकिन लूणकरनसर में त्रिकोणीय से चतुष्कोणीय बना हुआ है। नोखा में भी आमने-सामने की टक्कर की जगह तीसरा प्रभावशाली प्रत्याशी मैदान में है। कोलायत में भी आमने-सामने की जगह तीसरा मजबूत प्रत्याशी मैदान में डटा रहा। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा और कांग्रेस में कौनसी पार्टी जिले में आगे निकलती है।


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