Bikaner : इन्फ्लूएंजा के बढ़ते मामलों पर तैयारी,……










चीन में फैल रही रहस्यमय बीमारी एविएन इनफ्लूएंजा माइकोप्लाज्मा निमोनिया को लेकर चिकित्सा विभाग हरकत में आ गया है। बुधवार को जिले के पीबीएम हॉस्पिटल सहित सभी चिकित्सा संस्थानों में मॉकड्रिल का व्यवस्थाओं को देखा गया।
जिले में कुल 19 ऑक्सीजन प्लांट कोरोना के वक्त लगाए गए थे। इनमें से 11 पीबीएम हॉस्पिटल में हैं, जिसमें से जे वार्ड के दो, एसएसबी और हार्ट हॉस्पिटल का एक-एक प्लांट वर्किंग है। बाकी प्लांट इंस्टॉलेशन के बाद ऑपरेशनल नहीं हो सके। यानी इन्हें शुरू करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। इस वजह से इनकी मेंटिनेंस ही नहीं हो पाई। बुधवार को मॉकड्रिल के दौरान प्लांट चालू तो हो गए, मगर ऑक्सीजन जनरेट नहीं कर पा रहे हैं। इनके ऑक्सीजन सेंसर और फिल्टर खराब हो गए हैं। स्थित यह है कि इस बार इनफ्लूएंजा के केस बच्चों में होने की आशंका जताई जा रही है, जबकि पीबीएम बच्चा हॉस्पिटल का ऑक्सीजन प्लांट ही वर्किंग में नहीं है। टीबी हॉस्पिटल के दोनों प्लांट बंद है। इसके अलावा जिला अस्पताल सेटेलाइट का ऑक्सीजन प्लांट वर्किंग में है। जिले में नोखा, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़ और लूणकरणसर का प्लांट तैयार है। मगर वर्तमान में ऑपरेशनल नहीं है। नापासर के प्लांट का काम अब पूरा हुआ है। देशनोक प्लांट डीजी सेट के कारण अटका है। कोलायत का प्लांट ही अधूरा पड़ा है। अवाडा कंपनी काम बीच में ही छोड़ गई।
अनावश्यक डरना बंद करें
अफवाहों पर ध्यान न दें
डॉक्टर से परामर्श लें
दो गज दूरी, मास्क है जरूरी हाथों की स्वच्छता फ्लू ,स्वाइन फ्लू और निमोनिया का टीकाकरण
सांस में दिक्कत और बुखार होते ही डॉक्टर को दिखाएं।
यह ना करें
घरेलू उपचार जैसे पान ब्राम्ही की गोली घासा-घुटी ना लें।
घर में बिना डॉक्टर की सलाह के नेबुलाइजेशन ना करें
मॉकड्रिल के दौरान पीबीएम हॉस्पिटल में उपलब्ध सभी संसाधनों को देखा गया है। कुल 11 ऑक्सीजन प्लांट में से दो हैंड ओवर नहीं हुए। चार वर्किंग में हैं।
मॉक ड्रिल के दौरान बेड, आइसोलेशन, ऑक्सीजन सर्पोटेड, आईसीयू, वेंटीलेटर बेड, दवाइयां, उपकरण, तकनीकी सुविधा तथा उनकी आवश्यकता पड़ने पर क्रियाशीलता का जायजा लिया है।
डाॅ. मोहम्मद अबरार पंवार, सीएमएचओ
एक्सपर्ट के अनुसार ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट में बड़ा कंप्रेशर होता है जो बाहर की हवा खींचता है। वहां से हवा वेपोराइजर में जाती है, जहां उसमें से वॉटर पार्टिकल अलग हो जाते हैं। उसके बाद एयर स्टोरेज टैंक में हवा को स्टोर किया जाता है। इसमें लगे हुए फिल्टर हवा को फिल्टर करने का काम करते हैं। वहां से हवा प्रेशर स्विंग ऑब्जरवेशन में चली जाती है, जहां से कार्बनडाइ ऑक्साइड अलग होकर बाहर निकल जाती है। इसमें जीयो लाइट होता है, जो ऑक्सीजन को अलग कर उपयोग लायक बनाता है। प्योर ऑक्सीजन को बड़े टैंकों में स्टोर किया जाता है। टैंक फुल होने के बाद सप्लाई होती है। यह सिस्टम माइक्रो कंट्रोलर से चलता है।
पीबीएम हॉस्पिटल में 2496 बेड और 1826 तरह की दवाइयां हैं। इनमें आइसोलेशन बेड 500, ऑक्सीजन सपोर्ट बेड 350, आईसीयू बेड 355, वेंटीलेटर बेड 245 हैं। इनमें से करीब 500 बेड और 46 वेंटिलेटर बेड एमसीएच में हैं।
एक्सपर्ट : तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल के अनुसार रहस्यमय निमोनिया में तेज बुखार सांस लेने में दिक्कत ज्यादा है न की खांसी जुकाम, और ठीक होने में समय भी लग रहा है। चूंकि यह एक महामारी की तरह उतरी चीन में बच्चों में फैला है। इसलिए हमें भी सजग होना होगा। चीन में माइकोप्लाज्मा, इनफ्लुएंजा, एडिनोवायरस, आरएसवी जैसे बैक्टीरिया व वायरस का प्रकोप इस बार ज्यादा है, क्योंकि जीरो कोविड की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग व मास्क का प्रयोग बंद कर दिया गया। इस साल और विगत 3 साल में एक्सपोजर नही होने से रोग प्रतिरोधी क्षमता का ह्रास हुआ, जिसकी वजह से इस तीव्र गति से अधिक संख्या
बीमारों की आवक हुई। इनफ्लूएंजा की आशंका को देखते हुए दवाओं को स्टॉक तीन महीने का रखने की तैयारी शुरू कर दी गई है। वर्तमान में पीबीएम सहित जिला के अस्पतालों में एक महीने का स्टॉक है। इसके लिए प्रमुख रूप से एंटीबायोटिक, एंटी वायरल, एजिथ्रोमाइसिन, पेरासिटामोल, सिट्राजिन आदि दवाओं की जरूरत रहती है। सीएमएचओ डॉ. अबरार का कहना है कि एंटीबायोटिक कई तरह की होती है और इंफेक्शन की स्थित को देखते हुए इस्तेमाल की जाती है।

