हादसे में मरे सात पुलिसकर्मियों के घर में पसरा मातम….


नागौर हमेशा लोगों के निशाने पर रही खाकी भी कम मददगार नहीं है। साथ छोड़ गए साथियों की जिंदगी तो वापस नहीं ला सकती, लेकिन घर-घर जाकर दु:ख बांटने के साथ यथासंभव सहयोग की कोशिश का अनूठा नजारा दिख रहा है।

करीब दस दिन पहले चूरू जिले के कानूता गांव में खड़े ट्रोले और जीप की भिड़ंत में काल का ग्रास बने सात पुलिसकर्मियों के परिजनों को सांत्वना देना जारी है। महिला थाने के स्टाफ ने बुधवार को अपने साथी कांस्टेबल महेंद्र के घर जाकर एक लाख 31 हजार की मदद दी, वहीं खींवसर थाना के स्टाफ ने सभी मृतकों के घर एक-एक लाख की मदद पहुंचाई है। कभी कम न हो सकने वाले दुख से दु:खी परिवार के साथ खड़ा होने का यह काम भी सुकून के साथ हिम्मत देने वाला है।

इस हादसे में खींवसर थाने के एसआई रामचंद, कांस्टेबल कुंभाराम, थानाराम, सुखराम, सुरेश मीणा, हैड कांस्टेबल सुखराम खोजा के साथ महिला थाने के महेंद्र कुमार मेघवाल की मौत हो गई थी। संभवतया नागौर में पहला ऐसा हादसा था जिसमें सात पुलिसकर्मियों की मौत एक साथ हुई। नागौर में हुई मोदी यात्रा के बाद ये वीवीआईपी ड्यूटी के लिए झुंझुनूं जा रहे थे। एक साथ सात मौत, सात परिवार पर टूटा दु:खों का पहाड़। कहीं माता-पिता का इकलौता लाल चला गया तो कहीं छोटे-छोटे मासूमों का सहारा छूट गया। कहीं जल्द वापस आने की उम्मीद खत्म हो गई तो कहीं बच्ची को ब्याहने के सपने टूट गए। पार्थिव देह पर श्रद्धांजलि देने को पुलिस ही नहीं गांव-शहर के लोग आए। परिवार पर टूटे इस दु:ख पर पुलिसकर्मियों को दहाड़ मारते देखा गया। इस दु:ख में शामिल होने खुद आईजी लता मनोज कुमार किसी मृतक के घर पहुंची तो कहीं एसपी नारायण टोगस। एएसपी सुमित कुमार, सीओ ओमप्रकाश गोदारा, सदर सीआई सुखराम, कोतवाली सीआई रमेंद्र सिंह हाड़ा समेत अनेक पुलिस अफसर इस दु:ख में शामिल हुए। नियमों के तहत मिलने वाली सहायता के अतिरिक्त अन्य मदद के लिए भी मंथन किया गया। फिलहाल इसे चुनाव परिणाम तक के लिए टाल दिया गया।

बुधवार को महिला थाना प्रभारी कन्हैया लाल अपने परिजनों के साथ मृतक कांस्टेबल महेंद्र मेघवाल के घर जोधपुर के लवेरा पहुंचा। उन्होंने यहां महेंद्र के परिजनों को एक लाख 31 हजार रुपए की मदद की। महेंद्र के एक बेटा व एक बेटी है। हादसे को दस दिन हो चुके हैं। मृतकों के घर में सन्नाटा पसरा पड़ा है। रह-रहकर विलाप के सुर सुनाई देते हैं। कहीं बेटा अपने पिता को याद करता है तो परिजन रो पड़ते हैं तो कहीं बिटिया अपने पापा के नहीं आने पर खुद रो रही है। इन सूने घरों के सपने बिखर से गए हैं। जिंदगी फिर से पटरी पर तो आ जाएगी, लेकिन अपने को खोने के बाद इसे रफ्तार मिल पाना मुश्किल है। इन घरों में जाने वाले खींवसर थाना प्रभारी सत्यनारायण हो या फिर महिला थाना प्रभारी कन्हैयालाल, इनके अलावा नागौर जिले का हर पुलिसकर्मी, परिवार पर पड़ी विपदा में खुद को भी शामिल समझता है। यही नहीं अन्य सोशल साइट ग्रुप पर मदद का अभियान जारी है।


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