दर्दनाक सड़क हादसे में मरने वालों की संख्या हुई 8 ,घर के चिराग ने तोड़ा दम…


मेगा हाइवे पर ट्रोले व कार की भीषण भिड़ंत में जिंदा बचे कार सवार दो घायलों में से एक ने जयपुर में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस हादसे में मरने वालों की संख्या अब आठ हो गई है। जबकि हादसे में घायल दो वर्षीय बालिका का जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उपचार चल रहा है। अब परिवार में पैरालाइज होकर बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे साठ वर्षीय दादा गुरबचन सिंह और दो वर्षीय घायल बालिका मनराज ही बचे हैं।

जानकारी के अनुसार 16 वर्षीय आकाशदीप सिंह (16) पुत्र रामपाल सिंह का जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में उपचार चल रहा था। वहां रविवार को उसने दम तोड़ दिया। आकाशदीप की दो वर्षीय चचेरी बहन मनराज पुत्री खुशविन्द्र सिंह का जयपुर के जेके लोन अस्पताल में उपचार चल रहा है। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है। आकाशदीप का सोमवार को गमगीन माहौल में गांव नौरंगदेसर की कल्याण भूमि में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बाल कल्याण समिति अध्यक्ष जितेंद्र गोयल, सरपंच संदीप कौर, पूर्व प्रधान जयदेव भिड़ासरा आदि मौजूद रहे।

सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने ही घायल किशोर व बालिका को बेहतर इलाज के लिए बीकानेर से जयपुर रेफर कराया था। गौरतलब है कि मेगा हाइवे पर 28 अक्टूबर की रात को गांव नौरंगदेसर में कार सवार एक परिवार के सात जनों की हादसे में मौत हो गई थी। इनमें दो भाई व उनकी पत्नियां शामिल थी। इसके अलावा दोनों भाइयों की माता, एक भाई का पुत्र तथा एक भाई की पुत्री भी हादसे का शिकार हो गई।

घायलों में दो वर्षीय मनराज व 16 वर्षीय आकाशदीप शामिल थे। उनको पहले हनुमानगढ़ से बीकानेर और बाद में जयपुर रेफर कर दिया गया था। परिवार में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा है। क्योंकि दोनों बेटों, पुत्रवधुओं, पत्नी व पोता-पोती की मृत्यु के बाद बुजुर्ग गुरबचन सिंह ही परिवार में बचे हैं। जबकि एक पोता व पोती अस्पताल में उपचाराधीन हैं। गुरबचन सिंह पहले से ही पैरालिसिस से पीड़ित हैं। वे स्वयं दूसरों पर आश्रित हैं। हादसे में गुरबचन सिंह की पत्नी परमजीत कौर, पुत्र रामपाल सिंह (36), पुत्रवधू रीमा, पौत्री रीत तथा दूसरे बेटे खुशविन्द्र सिंह, पुत्रवधू परमजीत कौर व पौत्र मनजोत की मौके पर ही मौत हो गई थी।

दादा गुरबचन सिंह, अन्य रिश्तेदारों तथा ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अब इस परिवार को 16 वर्षीय किशोर आकाशदीप संभाल लेगा। मगर कुदरत को कुछ और ही मंजूर था। परिवार का आखिरी चिराग भी बुझ गया। बताया गया कि इलाज के दौरान आकाशदीप सिंह के स्वास्थ्य में कुछ सुधार भी हुआ। एक बार आकाशदीप होश में आया तो इशारों में अपने माता-पिता, भाई-बहन आदि के बारे में पूछा। उसके बाद फिर से कोमा में चला गया। बीमार दादा, ग्रामीणों और बहन को बहुत आशा थी कि यह घर में देखभाल करने के लिए जिंदा रह सके लेकिन दुआएं काम ना आई। रविवार को आकाशदीप भी इस दुनिया से विदा हो गया। अब परिवार में गुरबचन सिंह व उसकी पौत्री मनराज कौर ही बचे हैं।


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