कोई नया काम नहीं लिया तो भी देनदारियां बढ़ेंगी


गैर योजना के कामों ने यूआईटी की माली हालत खस्ता कर दी है। खाते में केवल 11.17 करोड़ रुपए बचे हैं, जबकि चुकाने 50 करोड़ रुपए हैं। डेढ़ करोड़ रुपए तो हर माह स्टॉफ, होमगार्ड की सैलरी में जाते हैं। यूआईटी की आवासीय योजनाएं डेवलपमेंट के लिए तरस रही हैं, जबकि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के कारण गैर योजनाओं में करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इससे यूआईटी की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है।


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