65 साल की महिला से 46 लाख की ठगी, फर्जी पूछताछ में 5 दिन तक हुई डिजिटल गिरफ्तारी










इंदौर में एक 65 वर्षीय महिला को साइबर अपराधियों ने चौंकाने वाली ठगी का शिकार बनाया। पांच दिन की फर्जी पूछताछ और डराने-धमकाने के बाद, महिला से 46 लाख रुपये ठग लिए गए। इस घटना ने डिजिटल ठगी के नए और खतरनाक पहलुओं को उजागर किया है, जहां धोखेबाज पीड़ित को कानून के नाम पर मानसिक दबाव में डालकर बड़ी रकम हड़प लेते हैं।
विस्तृत रिपोर्ट:
इंदौर की इस घटना में, पीड़िता ने बताया कि उसे 11 सितंबर, 2024 को एक कॉल आया। कॉलर ने खुद को दिल्ली स्थित दूरसंचार नियामक प्राधिकरण का अधिकारी बताया और महिला पर आरोप लगाया कि वह अपने जियो सिम कार्ड का उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए कर रही है। इसके बाद, उसे कई अलग-अलग नंबरों से कॉल आने लगे, जिनमें कॉल करने वाले खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए महिला को गिरफ़्तार करने की धमकी देने लगे।
महिला को डराया गया कि उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो सकती है और उसकी गिरफ़्तारी का वारंट तैयार है। घबराई महिला को कानूनी परेशानियों से बचने के लिए उसे विभिन्न बैंक खातों में 46 लाख रुपये ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया गया।
ठगों की योजना:
साइबर अपराधियों ने बड़ी चालाकी से महिला के मन में भय पैदा किया और उसे तुरंत धन हस्तांतरित करने के लिए मजबूर किया। ठगों ने उसे बताया कि उसका मामला गंभीर है और उसकी जान को खतरा हो सकता है। इस मानसिक दबाव के चलते महिला ने पांच दिन तक चली इस फर्जी पूछताछ के बाद 46 लाख रुपये की भारी राशि विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी। पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार, ठगों ने ‘डिजिटल गिरफ्तारी’ का नया तरीका अपनाया था, जिसमें उन्होंने पीड़िता को निरंतर फोन कॉल और धमकियों के जरिए मानसिक रूप से गिरफ्त में लिया।
पुलिस की प्रतिक्रिया:
इंदौर पुलिस के अतिरिक्त डीसीपी, राजेश दंडोतिया के मुताबिक, पीड़िता ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और ठगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि साइबर अपराधी नई तकनीकों का उपयोग करके भोले-भाले लोगों को ठगने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे वे अपनी मेहनत की कमाई खो देते हैं।
साइबर सुरक्षा के लिए चेतावनी:
यह घटना साइबर अपराधों से निपटने में सतर्कता और जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित करती है। पुलिस और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नागरिकों को किसी भी संदिग्ध फोन कॉल से सतर्क रहना चाहिए और अपने व्यक्तिगत जानकारी या धन को किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा नहीं करना चाहिए। इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि साइबर अपराधी किसी भी निर्दोष व्यक्ति को आसानी से फंसा सकते हैं।
इंदौर में इस घटना ने साइबर सुरक्षा की गंभीरता को उजागर किया है। वरिष्ठ नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि वे अक्सर ऐसे अपराधों के शिकार बन जाते हैं। इस मामले में पुलिस की जांच जारी है, और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही अपराधियों को पकड़ा जाएगा।

