बीडीए की सुस्त चाल…राजस्व गांवों के रेकॉर्ड की परेशानी, कमेटियों की बैठक नहीं होने से अटका विकास










बीडीए में लोग कर रहे है रोजमर्रा के काम भी नहीं होने की शिकायत। खासकर ले आउट प्लान कमेटी सहित तमाम कमेटियों की बैठकें नहीं हो पा रही है।
बीकानेर. बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) बनने से जनता को बड़ी उम्मीदें थी। नियोजित विकास और तेजी से शहर में विकास कार्य होने की उम्मीद बंधी। परन्तु अभी तक बीडीए का कामकाज गति नहीं पकड़ पाया है। खासकर ले आउट प्लान कमेटी सहित तमाम कमेटियों की बैठकें नहीं हो पा रही है। सीमा क्षेत्र के गांवों का राजस्व रिकॉर्ड व नक्शे बीडीए के पास नहीं होने से भी परेशानी आ रही है।
बीडीए में आमजन से जुड़ी सेवाओं को ऑनलाइन किया जा चुका है। परन्तु आम लोगों की शिकायत ऑनलाइन आवेदन करने के बाद निस्तारण नहीं किए जाने की है। आवेदक के बीडीए कार्यालय में चक्कर लगाने और संबंधित कार्मिक के पास पहुंचने के बाद ही फाइल आगे बढ़ पाती है। हालांकि इस मामले में भी बीडीए प्रशासन ऑनलाइन सेवाओं की परफोर्मेंस 80 से 90 प्रतिशत होने का दावा कर रहा है।
अवैध कॉलोनियों को मिल रहा बढ़ावा
कई निजी हाउसिंग प्रोजेक्ट के लेआउट प्लान अटके होने से शहर के बाहरी क्षेत्र में कोई नई आवासीय कॉलोनी विकसित नहीं हो रही है। इसका एक नुकसान अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिलने के रूप में सामने आ रहा है। कॉलोनाइजर स्टाम्प पर एग्रीमेंट कर लोगों को कृषि भूमि पर भूखण्ड बेच रहे हैं।
कमेटी की बैठक तक नहीं
बीडीए में ले आउट समेत कई तरह के मामलों पर निर्णय कमेटी करती है। गत 10 मार्च को ले आउट कमेटी की बैठक हुई लेकिन इसमें केवल सरकारी प्राजेक्टों पर ही विचार किया गया। निजी कॉलोनियों के ले आउट प्लान पर कोई विचार नहीं हुआ। इसका भी फायदा कुछ बड़े कॉलोनाइजर उठा रहे है। वह नहीं चाहते कि कोई नई कॉलोनी विकसित हो और उनकी काटी पुरानी कॉलोनी के भूखण्डों के दाम गिरे।
मुख्यमंत्री को शिकायत के बाद हलचल
पिछले दिनों मुख्यमंत्री दौरे के दौरान कुछ लोगों ने बीडीए में काम नहीं हो रहे होने की शिकायत की थी। इसमें भूरूपातंरण, मानचित्र स्वीकृति, एनओसी, निर्माण स्वीकृति जैसे रोजमर्रा के कार्य भी नहीं होना बताया गया। इसके बाद बीडीए में हलचल मची। अधिकारियों के स्तर पर ऑनलाइन आवेदनों के निरस्तारण की समीक्षा की गई है।
बीडीए आयुक्त अपर्णा गुप्ता से पत्रिका के सवाल और उनसे मिले जवाब
सवाल- ले आउट प्रकरणों का निस्तारण नहीं होने की समस्या क्यों है?
जवाब- ले-आउट प्रकरणों के प्राप्त होने उपरांत जांच कर ले-आउट कमेटी की बैठक में रखने होते है। प्राधिकरण को प्राप्त अधिकांश प्रकरण उन राजस्व ग्रामों से सम्बन्धित है, जिनका राजस्व रिकॉर्ड/तरमीम शुदा मानचित्र उपलब्ध नहीं है। ऐसे ले-आउट प्लान के अनुमोदन के सम्बन्ध में राज्य सरकार से मार्ग दर्शन मांगा गया है। इसके प्राप्त होने के उपरांत अनुमोदन संबंधी कार्यवाही की जा सकेगी।
सवाल- कमेटी की मीटिंग भी नहीं हो रही है क्या?
जवाब- ले आउट प्लान समिति की बैठक 11 मार्च को की गई थी। वर्तमान में विचाराधीन प्रकरणों को आगामी बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा। जो आगामी सात दिवस के अन्दर करना प्रस्तावित हैं।
सवाल- ऑनलाइन सेवाओं से राहत की जगह आहत क्यों?
जवाब- प्राधिकरण में 9 सेवाओं का पूर्णतः ऑनलाइन माध्यम से निस्तारण किया जा रहा है। इनमें प्रोपर्टी आईडी जनरेशन, नामान्तरण, लीज प्रमाण पत्र, सामुदायिक भवन बुकिंग, टेन्डरिंग, निर्माण स्वीकृति, उपविभाजन, एकीकरण, 90ए, ई-नीलामी व मोबाईल टावर स्वीकृति शामिल हैं। इसकी साप्ताहिक समीक्षा की जाती है। प्रदेश स्तर पर निस्तरण में प्राधिकरण चौथे स्थान पर रहा है।
सवाल- फिर बीडीए में काम नहीं होने की आम शिकायत कैसे?
जवाब- प्रोपर्टी आईडी के 98 प्रतिशत, नामान्तरण के 86 फीसदी, लीज मुक्ति प्रमाण पत्र के 90 प्रतिशत प्रकरणों का निस्तारण किया जा चुका है। इसी तरह 90ए के प्राप्त 260 प्रकरणों में से भी 80 प्रतिशत का निस्तारण किया है। भवन मानचित्र के 91 प्रतिशत का निस्तारण किया जा चुका है। शेष रहे प्रकरण कार्यालय या आवेदक के स्तर पर प्रक्रियाधीन हैं।

