राजनीति में जातियों की उलझी मैथ्स, टिकट बंटवारे में दिखाई इंजीनियरिंग…


कांग्रेस-भाजपा के चेहरे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और इसके साथ ही समीकरणों की राजनीति में जातियों को साधने की दलीय मजबूरियां भी साफ झलक रही हैं।

जाति-धर्म की राजनीति लगता है मौजूदा दौर में जोंक की तरह सभी दलों से चिपक कर रह गई है। यही वजह है कि भले ही राजनीति में सैद्धांतिक रूप से धर्म-जाति से परहेज करने की बातें होती रहती हों, लेकिन जब अमल करने की बात आती है, तो जिताऊ उम्मीदवार के नाम पर समझौते हो ही जाते हैं। इसके बाद जो तस्वीर उभर कर आती है, वह यही साबित करती है कि राजनीतिक पार्टियां इससे ऊपर नहीं उठ सकी हैं। विधानसभा चुनाव-2023 में नामांकन दाखिल करने का समय चल रहा है। कांग्रेस-भाजपा के चेहरे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और इसके साथ ही समीकरणों की राजनीति में जातियों को साधने की दलीय मजबूरियां भी साफ झलक रही हैं। दरअसल, जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने टिकट वितरण में जो फार्मूला अपनाया है, वह भी यही संकेत दे रहा है।

जिले के बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस की ओर से पुष्करणा समाज के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है। यहां भाजपा से जेठानंद व्यास और कांग्रेस से डॉ. बीडी कल्ला आमने-सामने हैं। कोलायत विधानसभा क्षेत्र में राजपूत समाज के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यहां भाजपा ने पूनम कंवर और कांग्रेस ने भंवर सिंह भाटी को चुनावी मैदान में उतारा है। लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र में जाट समाज से प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यहां भाजपा के सुमित गोदारा और कांग्रेस के डॉ. राजेन्द्र मूंड चुनाव मैदान में हैं। श्रीडूंगरगढ़ में सीपीएम से जाट समाज से गिरधारी लाल महिया चुनाव मैदान में है। वहीं कांग्रेस की ओर से मंगलाराम गोदारा नामांकन पत्र भर चुके हैं। जबकि भाजपा से ब्राह्मण समाज से प्रत्याशी ताराचंद सारस्वत हैं। खाजूवाला एससी समाज के लिए आरक्षित है। यहां कांग्रेस ने गोविन्दराम और भाजपा ने डॉ. विश्वनाथ को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि नोखा और बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अलग-अलग जाति-समाज से हैं।

जातिगत समीकरणों में उलझी मैथ्स, टिकट बंटवारे में दिखाई इंजीनियरिंग

locationबीकानेरPublished: Nov 06, 2023 09:12:23 am

Submitted by:

Vimal Changani

कांग्रेस-भाजपा के चेहरे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और इसके साथ ही समीकरणों की राजनीति में जातियों को साधने की दलीय मजबूरियां भी साफ झलक रही हैं।

जातिगत समीकरणों में उलझी मैथ्स, टिकट बंटवारे में दिखाई इंजीनियरिंग

जातिगत समीकरणों में उलझी मैथ्स, टिकट बंटवारे में दिखाई इंजीनियरिंग
जाति-धर्म की राजनीति लगता है मौजूदा दौर में जोंक की तरह सभी दलों से चिपक कर रह गई है। यही वजह है कि भले ही राजनीति में सैद्धांतिक रूप से धर्म-जाति से परहेज करने की बातें होती रहती हों, लेकिन जब अमल करने की बात आती है, तो जिताऊ उम्मीदवार के नाम पर समझौते हो ही जाते हैं। इसके बाद जो तस्वीर उभर कर आती है, वह यही साबित करती है कि राजनीतिक पार्टियां इससे ऊपर नहीं उठ सकी हैं। विधानसभा चुनाव-2023 में नामांकन दाखिल करने का समय चल रहा है। कांग्रेस-भाजपा के चेहरे लगभग स्पष्ट हो चुके हैं और इसके साथ ही समीकरणों की राजनीति में जातियों को साधने की दलीय मजबूरियां भी साफ झलक रही हैं। दरअसल, जिले के सात विधानसभा क्षेत्रों में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने टिकट वितरण में जो फार्मूला अपनाया है, वह भी यही संकेत दे रहा है।

पांच विधानसभा क्षेत्रों में एक समाज के प्रत्याशी आमने-सामने

जिले के बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में भाजपा और कांग्रेस की ओर से पुष्करणा समाज के प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है। यहां भाजपा से जेठानंद व्यास और कांग्रेस से डॉ. बीडी कल्ला आमने-सामने हैं। कोलायत विधानसभा क्षेत्र में राजपूत समाज के प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यहां भाजपा ने पूनम कंवर और कांग्रेस ने भंवर सिंह भाटी को चुनावी मैदान में उतारा है। लूणकरनसर विधानसभा क्षेत्र में जाट समाज से प्रत्याशी आमने-सामने हैं। यहां भाजपा के सुमित गोदारा और कांग्रेस के डॉ. राजेन्द्र मूंड चुनाव मैदान में हैं। श्रीडूंगरगढ़ में सीपीएम से जाट समाज से गिरधारी लाल महिया चुनाव मैदान में है। वहीं कांग्रेस की ओर से मंगलाराम गोदारा नामांकन पत्र भर चुके हैं। जबकि भाजपा से ब्राह्मण समाज से प्रत्याशी ताराचंद सारस्वत हैं। खाजूवाला एससी समाज के लिए आरक्षित है। यहां कांग्रेस ने गोविन्दराम और भाजपा ने डॉ. विश्वनाथ को चुनावी मैदान में उतारा है। जबकि नोखा और बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अलग-अलग जाति-समाज से हैं।

2018 में भी कई मुकाबले एक समाजके प्रत्याशियों में

वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भी जिले के सात में से पांच विधानसभा क्षेत्रों में एक ही जाति-समाज के प्रत्याशी चुनावी मैदान में आमने-सामने रहे थे। बीकानेर पश्चिम में पुष्करणा समाज, कोलायत में राजपूत समाज, लूणकरनसर में जाट समाज, श्रीडूंगरगढ़ में जाट समाज के प्रत्याशी आमने-सामने चुनावी मैदान में थे। खाजूवाला में एससी समाज के प्रत्याशी आमने-सामने थे।

नोखा व बीकानेर पूर्व में प्रत्याशी अलग समाज से

जिले के नोखा विधानसभा क्षेत्र और बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी अलग-अलग समाज से सामने आते रहे हैं। नोखा में वर्ष 2013 में रामेश्वर डूडी व कन्हैया लाल झंवर आमने-सामने थे। 2018 में भी अलग-अलग समाज के प्रत्याशी भाजपा-कांग्रेस से थे। बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र में वर्ष 2008 से अलग-अलग समाज के प्रत्याशी भाजपा-कांग्रेस से चुनावी मैदान में आमने-सामने होते रहे हैं। यहां वर्ष 2008 में राजपूत समाज की सिद्धि कुमारी के सामने मुस्लिम समाज से डॉ. तनवीर मालावत, वर्ष 2013 में सिद्धि कुमारी के सामने माली समाज के गोपाल गहलोत, वर्ष 2018 में सिद्धि कुमारी के सामने वैश्य समाज के कन्हैया लाल झंवर और इस बार माली समाज से कांग्रेस प्रत्याशी यशपाल गहलोत सामने हैं।


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