Bikaner : मानसिक कष्ट से बचने का महत्वपूर्ण उपाय ….


बीकानेर तेरापंथ भवन, भीनासर में स्नान के महत्व को उजागर करते हुए मुनि चैतन्य कुमार अमन ने धर्मसभा को संबोधित किया। कहा कि शास्त्रों में सत्य, तप और इन्द्रिय निग्रह को सर्वोत्तम स्नान बताया है।

शास्त्रों का पारायण करने से ज्ञान की वृद्धि होती है। स्वयं की पहचान तथा आत्म बोध के लिए शास्त्रों का अध्यापन के लिए व्यक्ति को स्वाध्याय करते रहना चाहिए। जो व्यक्ति स्वाध्यायी होता है वह अपने दायित्व का कुशलता से निर्वहन कर सकता है।

मानसिक संक्लेश से बचने का एक महत्त्व पूर्ण कार्य है- स्वाध्याय। उन्होंने स्वाध्याय का अर्थ है बताया – स्वयं के द्वारा स्वयं की पहचान। स्वाध्याय करते रहने से स्वयं के ज्ञान का विकास तथा धर्मसंघ की प्रभावना होती है। धर्मकथा करना भी स्वाध्याय का एक प्रकार है। ज्ञान के पर्यव निर्मल बनते हैं। अनेक प्रकार की समस्याओं का सहज समाधान हो जाता है। मानसिक संक्लेश स्वतः समाप्त हो जाते हैं। चेतना का जागरण तथा आत्मा निर्मल बन जाती है। अतः प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 20 मिनट अथवा आधा घंटा शास्त्र पठन व आत्म चिंतन में अवश्य लगाना चाहिए। मुनि अमन ने उदाहरण स्वरूप बताया कि जिस सूई में धागा पिरोया होता है जल्दी से वह गुम नहीं होती, गुम होने पर भी वह जल्दी ही मिल जाती है।

इसी प्रकार ज्ञानी व्यक्ति संसार में भटकते नहीं तथा ज्ञान सहित होने से वे पुनः मार्ग पर आ जाते हैं अतः प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान का विकास करना चाहिए। इस अवसर पर शिखर चन्द सेठिया, सोहनलाल सेठिया, महेश गोलछा, शांतिलाल बैद, शिखर चन्द बोथरा आदि ने विचार रखे। मुनि अमन ने बताया कि दीपावली के अवसर भगवान महावीर का निर्वाण दिवस त्याग-तप-संयम साधना के साथ मनाया जाएगा।


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