बीकानेर रियासत में वर्ष 1913 में देश की पहली लेजिस्लेटिव असेंबली (जन प्रतिनिधि सभा) का गठन हुआ था…..










बीकानेर रियासत में वर्ष 1913 में देश की पहली लेजिस्लेटिव असेंबली (जन प्रतिनिधि सभा) का गठन हुआ था। इस सभा को न केवल कानून बनाने, बजट आदि पर चर्चा करने का अधिकार था बल्कि आमजन से जुड़े मुद़दे रखने और सवाल-जवाब का भी अधिकार सदस्यों को प्राप्त था।
देश की आजादी के बाद भले ही देश में लोकसभा और विधानसभाओं के माध्यम से आमजन की बात को मुखरता के साथ रखने की व्यवस्था प्रारंभ हुई, लेकिन बीकानेर रियासत में आज से 110 साल पहले ही यह व्यवस्था प्रारंभ हो गई थी। बीकानेर रियासत में वर्ष 1913 में देश की पहली लेजिस्लेटिव असेंबली (जन प्रतिनिधि सभा) का गठन हुआ था। इस सभा को न केवल कानून बनाने, बजट आदि पर चर्चा करने का अधिकार था बल्कि आमजन से जुड़े मुद़दे रखने और सवाल-जवाब का भी अधिकार सदस्यों को प्राप्त था। बीकानेर राज्य के महाराजा गंगासिंह इस लेजिस्लेटिव असेंबली के पहले सभापति थे। पहली असेंबली की पहली बैठक 10 नवंबर 1913 को हुई थी। पहली सभा आज जहां शिक्षा निदेशालय है, वहां मौजूद जार्ज पंचम हॉल में असेंबली की बैठक हुई थी।
बीकानेर रियासत में गठित हुई लेजिस्लेटिव असेंबली में 31 सदस्य थे। डॉ. महेन्द्र खड़गावत के अनुसार महाराजा गंगासिंह इस असेंबली के पहले सभापति थे। उप सभापति भैरोंसिंह थे। सदस्यों में महाराजा जगमाल सिंह, राय बहादुर राजा हरिसिंह महाजन, राव कान सिंह भुकरका, राव राजा जीवराज सिंह रेडी, ठाकुर विजय सिंह सांखू, ठाकुर सादुल सिंह जसाना, ठाकर किशन सिंह रासवाना, सेठ रतन दास बागड़ी, पुरोहित बख्तावर सिंह, शेख मोहम्मद इब्राहिम आदि सदस्य थे। सदस्य महाराजा की ओर से मनोनीत और मनोनीत सदस्यों की ओर से मनोनीत सदस्य थे। क्षेत्र विशेष के विशेषज्ञ इस असेंबली के सदस्यों के रुप में मनोनीत किए जाते थे।
डॉ. खड़गावत के अनुसार महाराजा गंगासिंह ने अपने शासन के 25 साल पूरे होने पर कई घोषणाएं की थी, उनमें लेजिस्लेटिव असेंबली की घोषणा भी थी। 24 सितंबर 1912 को इसकी घोषणा की गई। नोटिफिकेशन भी उसी दिन जारी कर दिया गया। इसके बाद लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट का भी गठन किया गया। डॉ. खड़गावत के अनुसार उपलब्ध अभिलेखों व हस्ताक्षरों के अनुसार 3 दिसंबर 1946 तक असेंबली का संचालन हुआ। सदस्यों के हस्ताक्षर उपलब्ध है। असेंबली सदस्यों की बैठकें व सेशन समय -समय पर होते रहते थे।
वर्तमान में जिस प्रकार से लोकसभा व विधानसभाओं में सदस्यों को सवाल करने और मंत्रियों की ओर से जवाब देने की व्यवस्था है, पहली लेजिस्लेटिव असेंबली में भी यह व्यवस्था थी। सदस्यों की ओर से पूछे गए सवालों और मंत्रियों-सचिवों की ओर से दिए गए जवाब के साक्ष्य उपलब्ध है। डॉ. खड़गावत ने अपनी पुस्तक लेजिस्लेटिव असेंबली ऑफ बीकानेर स्टेट बीकानेर राज सभा में उपलब्ध अभिलेखों को उल्लेखित किया है।..

