बीकानेर : देर रात तक जमने लगी चुनावी रंगत….


कभी परकोटे के भीतर तक सिमटा बीकानेर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र अब पंख फैला चुका है। बीते दो दशक में इस विधानसभा सीट के पश्चिम और दक्षिण की तरफ तेजी से बसावट हुई है। अब परकोटे के मतदाताओं के साथ इससे बाहर रहने वाले वोटरों की तादाद भी काफी बड़ी हो चुकी है

बीते तीन चुनाव से दो ही चेहरे आमने-सामने रहे। परकोटा भी दो खेमों में बंटता रहा है। इस बार परकोटे से बाहर बड़ी तादाद में मतदाताओं के जुड़ने और एक पुराने चेहरे के सामने नया चेहरा आने से चुनाव भी दिलचस्प बन गया है।

उपनगरीय क्षेत्र गंगाशहर का बड़ा हिस्सा, बंगलानगर, मुरलीधर व्यास कॉलोनी से लेकर विश्वविद्यालय तक बसे लोग और सुजानदेसर-श्रीरामसर का हिस्सा बीकानेर पश्चिम में शामिल है। परकोटे में सघन आबादी तथा देर रात तक चुनावी रंगत जमने से राजनीति का केन्द्र यही क्षेत्र बना हुआ है। यहां से बना माहौल ही आस-पास के क्षेत्र तक प्रभाव डालता है।

पश्चिम सीट पर बीते पन्द्रह साल से राजनीति की धूरी में कल्ला और जोशी परिवार रहे हैं। लगातार दो बार गोपाल जोशी भाजपा से जीते और पिछला चुनाव डॉ. बीडी कल्ला कांग्रेस से जीते। लगातार तीन चुनाव में यह दोनों चेहरे ही आमने-सामने रहे। इस बार मुकाबला डॉ. कल्ला बनाम जोशी की जगह जेठानंद व्यास में है। कुछ निर्दलीय भी मैदान में उतरकर वोटों की जोड़-तोड़ करेंगे।

पुरानी परिपाटी के अनुरूप परकोटा में धीरे-धीरे दो खेमे बनते जा रहे हैं। इससे बाहर रहने वाला वोटर जरूर मौन है। यह वोटर किसी एक वर्ग या समुदाय के ठपे वाले नहीं है। बल्कि शहरीकरण की धारा में बहकर ग्रामीण अंचल से शहर के आस-पास बसे हैं। गंगाशहर पुरानी लाइन-भीनासर जरूर पुराने बसे लोगों का ही है। इनमें भी आबादी बढ़ी है।

 

पश्चिम विधानसभा क्षेत्र को ही मूल बीकानेर माना जाता है। इसे लेकर कुछ साल पहले तक विश्व का सबसे बड़ा गांव होने की बात भी कही जाती थी। परन्तु बीते दशक में सोच बदली है। अब युवा पीढ़ी तेजी से बाहरी दुनिया के सम्पर्क में आई है। सोशल मीडिया ने भी पुरानी स्थापित सोच की धारा पर असर डाला है। इसका असर चुनाव पर भी है। आज ब्लॉग, रील और शॉर्टस बनाकर नेताओं के प्रचार किए जा रहे हैं।



 


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